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 दो PMC खाताधारकों की मौत के बाद सतर्क हुए बैंक, कहा एक लाख से ज्यादा की जिम्मेदारी नहीं
October 18, 2019 • Prabhat Vaibhav Bureau

नई दिल्ली।। पंजाब और महाराष्ट्र को-आप्रेटिव बैंक (PMC) में हुए घोटाले के बाद बैंक के 2 खाताधारकों की मृत्यु के बाद बैंक अब चौकन्ना हो गए हैं। बैंकों ने खाताधारकों की पासबुक पर डीआईसीजीसी क्लॉज का हवाला देकर एक लाख रुपए से ऊपर की रकम की जिम्मेदारी लेने से इंकार करने की बात की है। 

गौरतलब है कि इस संबंध में RBI ने वर्ष 2017 को सर्कुलर जारी किया था, जिसका पालन HDFC बैंक द्वारा किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर HDFC बैंक की पासबुक पर लगे डिपॉजिट बीमा के स्टैंप के बारे एक मैसेज वायरल हो रहा है। इस वायरल मैसेज में कहा गया है कि अगर HDFC बैंक पर किसी तरह का संकट आता है तो ग्राहक को जमा राशि पर अधिकतम 1 लाख रुपए ही मिलेंगे। यानी बैंक में ग्राहकों के भले ही 1 लाख रुपए से अधिक की जमा राशि हो लेकिन बैंक सिर्फ 1 लाख रुपए तक देने को बाध्‍य है। 

मैसेज के मुताबिक ग्राहकों को यह राशि क्‍लेम की तारीख के दो महीने के भीतर मिलेगा। इन परिस्थितियों में अब HDFC बैंक की सफाई देते हुए कहा कि यह नियम पुराना है। बैंक की ओर से दी गई सफाई में कहा गया है कि RBI ने 22 जुलाई, 2017 को सर्कुलर जारी किया था, जिसका पालन किया जा रहा है।

बता दें कि पासबुक पर लगे जिस स्टैंप का मैसेज वायरल हो रहा है, उसमें लिखा है कि बैंक में जमा राशि डीआईसीजीसी से बीमित है और अगर बैंक दिवालिया होता है तो फिर डीआईसीजीसी प्रत्येक जमाकर्ता को पैसा देने के लिए दिवालिया शोधक के जरिए बाध्यकारी है। डिपाजिट इंश्योरेंस एंड क्रैडिट गारंटी कार्पोरेशन रिजर्व बैंक आफ इंडिया की सहयोगी संस्था है और देश के सारे कमर्शियल बैंक और को-आपरेटिव बैंकों में जमा होने वाले पैसे का डीआईसीजीसी के पास बीमा होता है। 

बैंकों के सेविंग अकाऊंट, करंट अकाऊंट और फिक्स डिपाजिट के अलावा अन्य सभी तरह की जमा पर डीआईसीजीसी बीमा देता है। डीआईसीजीसी की वेबसाइट के मुताबिक भी यदि बैंक का लाइसेंस रद्द हो जाता है या बैंक का विलय हो जाता है या लिक्विडेशन की समस्या आती है तो बैंकों में जमा हुई 1 लाख रुपए तक  ब्याज सहित राशि का ही दावा किया जा सकता है।